जीएसटी काउंसिल:रियल एस्टेट सेक्टर पर जीएसटी 18 से घटाकर 5% किया जा सकता है|

  • बिल्डर को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, उसे रजिस्टर्ड डीलर से ही माल खरीदना होगा

  • कारोबारियों के लिए 40-50 लाख रु तक की जा सकती है जीएसटी रजिस्ट्रेशन में छूट की लिमिट

नई दिल्ली. जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक जारी है। इसमें कारोबारियों के लिए खासकर रियल सेक्टर से जुडे आम लोगों को एक बड़ी राहत टैक्स दर में कमी के रूप में मिल सकती है।सूत्रों के मुताबिक टैक्स की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी की जाएगी, लेकिन इसके बदले में बिल्डर को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नहीं मिलेगा। साथ ही बिल्डर कच्चे बाजार से सीमेंट, रेत, सरिया आदि माल नहीं खरीदे इसके लिए यह शर्त भी जोडी जाएगी कि उसे रजिस्टर्ड डीलर्स से ही माल खरीदना होगा।

इस तरह होगा टैक्स गणित- राहत और समस्या भी: अभी निर्माणाधीन प्रॉपर्टी खरीदने पर उसकी कीमत में से एक तिहाई कीमत घटाकर (जमीन की कीमत हटाने के लिए) शेष कीमत पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। जैसे फ्लैट की कीमत 50 लाख है तो इसमें एक तिहाई कीमत घटाने पर 35 लाख रुपए का फ्लैट होता है और इस पर 18 फीसदी जीएसटी यानि 6.30 लाख रुपए का टैक्स भार ग्राहक पर आता है।

 

नए समीकरण में फ्लैट की पूरी कीमत पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा, यानि कि 50 लाख के फ्लैट पर 5 फीसदी की दर से ग्राहक को ढाई लाख रुपए टैक्स देय होगा। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि आईटीसी मिलने के कारण बिल्डर पर टैक्स का भार 3 से 5 फीसदी आता है, लेकिन अब नए समीकरण में पूरा 5 फीसदी टैक्स भार आएगा, बिल्डर इस भार को सहने की बजाय माल की कीमत बढ़ाएगा।

सेवाएं भी कंपोजीशन के दायरे में : जीएसटी में कंपोजीशन सुविधा माल सेक्टर को ही मिलती है, सेवाओं में अभी केवल रेस्टारेंट ही है, अब इस पर सभी सहमत हो गए हैं कि 50 लाख रुपए तक का सालाना टर्नओवर वाले सेवा कारोबारियों को भी कंपोजीशन का लाभ दिया जाए।

कंपोजीशन वाले साल में एक रिटर्न दे सकेंगे: यह भी फैसला संभव है कि कंपोजीशन वाले कारोबारी जो अभी तिमाही रिटर्न और टैक्स भरते है, उन्हें राहत दी जाए कि वह टैक्स तो तिमाही भरेंगे, लेकिन रिटर्न साल में एक बार ही देंगे|

टर्नओवर सीमा 40 से 50 लाख रु हो सकती है: कुछ दिन पहले मंत्री समूह की बैठक में यह भी सहमति बनी थी कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन की 20 लाख रुपए सालाना टर्नओवर की मौजूदा लिमिट बढ़ाई जाए। हालांकि, यह तय नहीं हुआ कि इसमें कितनी बढ़ोतरी की जाए। लेकिन, सूत्रों के मुताबिक 40 से 50 लाख रुपए तक बढ़ाई जा सकती है।

 

छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत

चुनावों से पहले MSMEs सेक्टर को बड़ी सौगात मिली है. सरकार ने GST थ्रेशहोल्ड की लिमिट 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दी है. इससे छोटे और मंझोले कारोबारियों को फायदा मिलेगा साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. इसका सीधा सा मतलब ये है कि अब 40 लाख रुपए तक सालाना टर्नओवर करने वाले कारोबारी को GST रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी.

अंडर कंस्ट्रक्शन घरों पर नहीं घटा GST

सूत्रों के मुताबिक फिलहाल सरकार ने सस्ते घरों को लेकर कोई राहत नहीं दी. अंडर कंस्ट्रक्शन घरों पर GST घटाने पर सहमति काउंसिल की बैठक में नहीं बनी. अब इस मामले को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स को भेजा जाएगा. अगर ये GoM, GST करने का सुझाव देता है तभी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर टैक्स कम किया जाएगा.

बढ़ाया गया कंपोजीशन स्कीम का दायरा

बार-बार GST रिटर्न फाइल करने वाले व्यापारियों को राहत देते हुए सरकार ने कंपोजीशन स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है. अब एक करोड़ रुपए की बजाय 1.5 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले स्मॉल ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर भी कंपोजीशन स्कीम के दायरे में आएंगे. नया नियम 1 अप्रैल, 2019 से लागू किया जाएगा. इतना ही नहीं, कंपोजीशन स्कीम का फायदा सर्विस सेक्टर को भी मिलेगा. अब छोटे कारोबारियों को 6 परसेंट फ्लैट GST देना होगा. इसके अलावा सबसे बड़ी राहत ये है कि कंपोजीशन स्कीम के दायरे में आने वाले कारोबारी तिमाही की बजाय, सालाना आधार पर रिटर्न फाइल कर सकेंगे. आपको बता दें कि कंपोजीशन स्कीम में आने वाले कारोबारियों के लिए कुल बिक्री पर एकमुश्त GST जमा करना होता है और टैक्स भी एक फिक्स रेट्स पर देना होता है.

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