कम्पनियो में बड़ा ऐलान, स्मोकिंग नहीं करने वाले कर्मचारियों को मिलेंगी ज्यादा छुट्टियां |

नई दिल्ली : अगर आपके ऑफिस में भी यह नियम लागू हो जाए कि सिगरेट नहीं पीने वालों को स्मोकिंग करने वालों से ज्यादा छुट्टियां मिलेंगी, तो कैसा हो. ऐसा होने पर शायद कुछ एम्पलाई स्मोकिंग छोड़ दें. हो सकता है कि आपको यह खबर पढ़कर यकीन न हो लेकिन एक कंपनी ने ऐसा ही किया है. जिस कंपनी की हम बात कर रहे हैं उसके नए नियम के अनुसार स्मोकिंग छोड़ने वाले कर्मचारियों को स्मोक करने वालों की तुलना में ज्यादा छुट्टियां दी जाएंगी.

कर्मचारी ने की थी शिकायत
पिलाला इंक नामक मार्केटिंग फर्म की तरफ से अपने ऐसे कर्मचारियों को हर साल 6 छुट्टियां ज्यादा देने की घोषणा की गई है जो स्मोकिंग नहीं करते या स्मोकिंग छोड़ने का फैसला करते हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी को अपने पॉलिसी में बदलाव करना पड़ा. दरअसल कंपनी के एक स्मोकिंग नहीं करने वाले कर्मचारी की तरफ से शिकायत की गई कि धूम्रपान करने वाले उससे ज्यादा ब्रेक लेते हैं और इससे कंपनी की प्रोडक्टिविटी प्रभावित होती है. उसने अपनी शिकायत में आगे कहा कि ऑफिस 29वें फ्लोर पर है और स्मोकिंग रूम बेसमेंट में स्थित है.

स्मोक ब्रेक में रोजाना 15 मिनट होते हैं बेकार
इसके बाद कंपनी ने अनुमान लगाया कि एक कर्मचारी रोजाना स्मोक ब्रेक में कम से कम 15 मिनट का समय लगाता है. और ऐसे में पूरे साल में काफी समय सिगरेट ब्रेक के लिए जाता है.और इस अनुमान के बाद कंपनी ने स्मोकिंग नहीं करने वाले या इस घोषणा के बाद स्मोक छोड़ने वाले कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टियां देने का ऐलान किया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि नॉन-स्मोकर्स कर्मचारियों के टाइम को मैनेज किया सके.

चार कर्मचारियों ने धूम्रपान छोड़ने का फैसला लिया
जापान की इस कंपनी के करीब 35 प्रतिशत कर्मचारी धूम्रपान करते हैं. इस घोषणा के बाद चार कर्मचारियों ने धूम्रपान छोड़ने का फैसला कर लिया. और आपको बता दें कि जापान स्मोकिंग कल्चर के लिए पहचाना जाने वाला देश है और करीब 18 प्रतिशत जापानी स्मोकिंग करते हैं. आंकड़ों के अनुसार जापान में हर साल 1.3 लाख लोगों की मौत स्मोकिंग के कारण होने वाली बीमारियों से होती है. यहां की सरकार ने भी स्मोकिंग की रोकथाम के लिए कई उपाय किए हैं. और भारत में भी स्मोकिंग की समस्या दिन पर दिन बढ़ रही है. अगर देश की कंपनियां भी इस तरह की घोषणा कर्मचारियों के हित में करती हैं तो इससे देश में धूम्रपान करने वालों की संख्या कम हो सकती है.

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