महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर संभावनाएं बढ़ीं, अलग लड़े तो दोनों का होगा बड़ा नुकसान…

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच तीखे वाकयुद्ध के बावजूद गठबंधन की संभावनाएं बरकरार है। हाल में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे और भाजपा नेता व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच गुप्त मुलाकात भी हुई थी। दरअसल विपक्षी दलों के बीच राज्यवार बन रहे गठबंधनों को देखते हुए भाजपा पर भी अपने गठबंधन को मजबूत रखने का दबाव बढ़ा है। और दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में अलग चुनाव लड़कर घाटे में रही शिवसेना भी संशय में है। शिवसेना बिहार में जदयू की तरह भाजपा के साथ लोकसभा में बराबर सीटें और विधानसभा में ज्यादा सीटें चाहती हैं।

शिवसेना नेतृत्व की तल्ख भाषा को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हाल में दो टूक कहा था कि अगर सहयोगी दल भाजपा के साथ नहीं आना चाहता तो भाजपा उसको भी पराजित कर देगी। इससे शिवसेना के भी सुर और तीखे हुए, लेकिन शिवसेना भाजपा व केंद्र सरकार से अलग होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। राज ठाकरे के नेतृत्व में मनसे का गठन होने के बाद शिवसेना में अंदरूनी कमजोरियां उभरी थी, जिससे वह अभी तक नहीं उबर पाई है। और ऐसे में भाजपा के साथ सत्ता में रहना उसकी भी मजबूरी है। बिना गठबंधन के जाने पर शिवसेना को भी नुकसान होगा।

दूसरी तरफ राज्यवार हो रहे विपक्षी गठबंधनों ने भाजपा की धड़कनें बढ़ाई हुई हैं। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस व राकांपा का गठबंधन तय है। और पिछली बार भाजपा के साथ लड़े स्वाभिमान पक्ष के राजू शेट्टी भी इस बार विरोधी खेमे के साथ खड़े हैं। चूंकि शिवसेना भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है ऐसे में उससे नाता तोड़ने से राजग की गठबंधन की राजनीति को गलत संदेश जाएगा। चूंकि अगले चुनाव में विपक्षी गठबंधनों के जबाब में राजग को भी मजबूत गठबंधन का संदेश देना जरूरी है, इसलिए भाजपा गठबंधन पर लगातार जोर दे रही है।

जद (यू) की तरह भाजपा से तालमेल चाहती है अब शिवसेना
भाजपा के एक प्रमुख नेता ने शिवसेना के अलग लड़ने के बयानों पर कहा कि अगर वे वाकई में अलग लड़ने जा रहे होते तो अभी तक केंद्र व राज्य सरकार से बाहर हो गए होते। अब यदि अलग होते हैं तो जनता भी देखेगी कि पांच साल सत्ता की मलाई खाने के बाद अलग हो रहे हैं। इससे शिवसेना को ज्यादा ही नुकसान होगा। और सूत्रों के अनुसार, शिवसेना लोकसभा में भाजपा को ज्यादा सीटें देने को तैयार है, लेकिन वह विधानसभा में भाजपा से ज्यादा सीटें चाहती है।जो की इसके लिए वह बिहार में भाजपा जद (यू) के फार्मूले का भी जिक्र करती है।

पिछली बार भारी जीत मिली थी,
महाराष्ट्र में पिछली बार भाजपा व शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था और राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 41 पर जीत दर्ज की थी। जो की इसके बाद सीटों के बंटवारे पर विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के रिश्ते बिगड़ गए थे। और दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा जिसमें भाजपा शिवसेना पर भारी पड़ी और उसने सरकार बनाई। और बाद में शिवसेना भी सरकार में शामिल हो गई। अभी केंद्र व राज्य दोनों जगह शिवसेना, भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा है

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