अयोध्या विवाद / संतों का सरकार को ‘धर्मादेश’- राममंदिर के लिए कानून बने या अध्यादेश आए

  • अखिल भारतीय संत समिति ने कहा- मंदिर निर्माण में देरी से लोगों के मन में रोष, कानून व्यवस्था भी बिगड़ सकती है
  • समिति ने कहा- सरकार को कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई करने की अपील करनी चाहिए

नई दिल्ली.  राम मंदिर निर्माण को लेकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संतों की दो दिवसीय बैठक ‘धर्मादेश’ का समापन हुआ। इस दौरान समिति द्वारा बनाया गया एक धर्मादेश भी पढ़ कर सुनाया गया। इसमें सरकार से अयोध्या में जल्द राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने या अध्यादेश लाने के लिए कहा गया है।

समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा, “राममंदिर के लिए सरकार कानून लाए या अध्यादेश, यही है संतों का धर्मादेश।” उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई करने के लिए अनुरोध करना चाहिए। सरकार को कोर्ट में बताना चाहिए कि राममंदिर को लेकर जनता के मन में रोष है और कानून व्यवस्था भी बिगड़ सकती है।

 

‘सरकार का काम व्यवस्थाएं और कानून बनाना’

सरस्वती ने कहा-  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चेल्मेश्वर ने भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अदालत में विचाराधीन मामलों पर भी अध्यादेश ला सकती है और कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम व्यवस्थाएं और कानून बनाना है और न्यायालय का कार्य कानून की व्याख्या करना है। सरकार जो भी उचित समझे, उसे करे जिससे राममंदिर निर्माण हो सके।

 

राम मंदिर के लिए जनमत बनाने के लिए देश भर में होंगी सभाएं 
सरस्वती ने कहा कि लोकतंत्र में जनमत के आधार पर फैसले लिए जाते हैं। इसलिए संत देश में जनमत बनाने का काम करेंगे। इसके लिए 25 नवंबर को अयोध्या, नागपुर और बेंगलुरु में संतों की विशाल धर्मसभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके 500 जिलों में बड़ी बड़ी सभाएं की जाएंगी। इसके बाद दिल्ली में भी एक विशाल धर्मासभा होगी।

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