उत्तर भारत की सबसे बड़ी रथयात्रा इस साल खेल जगत को प्रोत्साहित करेगी…

उत्तरप्रदेश चंदौसी: भगवान गणेश रथ यत्रा- कभी रुपये कभी मोती,कभी चांदी, कभी मेवा तो कभी मसाले,गेहूं,कांसा, सब्जियों के प्रयोग से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा इस बार स्पोट्र्स सामग्री से हैं बन रही है। उत्तर भारत की सबसे बड़ी रथयात्रा इस साल खेल जगत को प्रोत्साहित करेगी। हर साल विष्न विनाशक भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा अलग-अलग संदेश देती रही है। हर साल कारीगर प्रतिमा को बनाने में अलग सामग्री का प्रयोग करते हैं। शिल्पकार बताते हैं कि पिछले सालों में प्रतिमा को मोती, रुपये चांदी सिक्के, मेवा मसाले गेहूं कांसा, सितारे, सब्जियों, स्टील बर्तन ,श्रृंगार सामग्री आदि से बनाया जा चुका है, लेकिन इस बार रथयात्रा का मुख्य आकर्षण बनने वाली भगवान गणेश की भीमकाय झांकी की प्रतिमा को स्पोर्ट्स सामग्री से बनाया जा रहा है। इसमें क्रिकेट,हॉकी,कबड्डी सहित कई इंडोर गेम्स में प्रयोग होने वाली सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। यह उपकरण काफी छोटे-छोटे आकार हैं, जिन्हें श्रीगणेश की प्रतिमा के सभी अंगों पर लगाया गया है।

यह सब डा. गिरिराज किशोर की प्रेरणा से किया जाता है। जब प्रतिमा का निर्माण शुरू होता है तो उससे पहले डा. गिरिराज किशोर से परामर्श किया जाता है। देश खेलों में लगातार तरक्की कर रहा हैं। बड़े अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई है। खेलों से युवा वर्ग जुड़ा होता है। यही के कारण है कि इस बार की रथयात्रा खेलों को समर्पित है।

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