सबरीमाला मंदिर में सब महिलाओं को जाने का हक़ ,सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सबरीमाला मंदिर के बहाने हमारे देश में एक नई बहस छिड़ गयी है | कल सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जब फैसला सुनाया कि सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलायें प्रवेश कर सकती हैं तो धार्मिक स्वतंत्रता की बात करने वाले हर मुँह से सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद निकला और न्याय व्यवस्था पर उनका विश्वास और अडिग हुआ |

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाओं के मासिक धर्म की स्थिति उनके निजी जीवन का हिस्सा है | इस प्रकार की शारीरिक प्रक्रिया और जीवनशैली को लेकर के किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव उचित नहीं है | अतः सबरीमाला मंदिर में हिन्दू धर्म में जन्म लेने वाला हर इंसान को प्रवेश ,दर्शन की अनुमति होनी चाहिए | कोर्ट के फैसले के बाद धर्म में आस्था रखने वाली 10 से 50 साल की महिलाओं में हर्ष की लहर दौड़ पड़ी जिन्हें कल तक सबरीमाला मंदिर में दर्शन की अनुमति नहीं थी | सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भी महिलाओं के मौलिक अधिकार को और मजबूत करता है साथ ही साथ यह भी दर्शाता है कि एक ही धर्म और समुदाय में धार्मिक विभिन्नता किसी भी प्रकार से सही नहीं है | यह विचार समाज को बाँटता है | सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से धार्मिक स्वतंत्रता को और बल मिला | हालाँकि महिलाओं के हक़ में होने वाले इस निर्णय में अकेली महिला जज इंदु मल्होत्रा की राय जुदा थी जिन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ के अन्य चार सदस्यों का मत महिलाओं के पक्ष में था | इस निर्णय के बाद अब भविष्य में दूसरे मंदिरों और मस्जिदों में सामाजिक भेदभाव वाले नियम-कायदे को चुनौती मिलने की सम्भावना बढ़ गयी है |

सबरीमाला मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 180 किमी दूर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है | यहाँ हर वर्ष करोड़ों की में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं | सबरीमाला का अर्थ है पर्वत | विशेष उम्र की महिलाओं को अनुमति न मिलने के पीछे मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे ऐसे में किशोरी एवं युवतियों का मंदिर में प्रवेश वर्जित थी जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद से समाप्त हो गयी है | ज्ञात को कि इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया है |

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