” द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ” का ट्रेलर जारी होते ही कांग्रेस खेमे में इतनी बेचैनी क्यों ?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके पत्रकार और लेखक संजय बारू की किताब पर आधारित फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ‘ का ट्रेलर रिलीज होते ही आधे कांग्रेसियों की बुद्धि चकरा गयी है | अभी हाल में ही कुछ अच्छे दिन दिखे थे और लोकसभा चुनाव की तैयारियों में राहुल गाँधी के बढ़िया-बढ़िया पोस्टर डिजाइन हो रहे थे कि अचानक से गड़े मुर्दे उखाड़ने के लिए विजय रत्नाकर गुट्टे और अनुपम खेर कमर कस कर मैदान में कूदने को तैयार हैं |भाजपा और बॉलिवुड भले ही इसे अभिव्यक्ति की आजादी करार दे लेकिन चुनावी माहौल में इस फिल्म का रिलीज होना राजनैतिक एजेंडे से प्रेरित मानी जाएगी क्योंकि चुनावी पंडितों का मानना है कि मनमोहन सिंह को कांग्रेस आलाकमान के हाथों का रिमोट कंट्रोल साबित करती हुई यह फिल्म बीजेपी को आगामी चुनाव में फायदा पहुँचा सकती है और यही कारण है कि बीजेपी इस फिल्म के रिलीज को तुरुप का इक्का समझ रही है |

यह बात हमेशा चर्चा में रही कि यूपीए के दूसरे कार्यकाल में मनमोहन सिंह की वास्तव में नहीं चली | निर्णय वही पारित होता था जो सोनिया और राहुल चाहते थे | मनमोहन सिंह के अधिकार क्षेत्र में बस साइन करना ही था | चूँकि संजय बारू 2004 से 2008 तक मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार थे अतः उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की मजबूरियों वाकायदा अध्ययन किया | जो इस पुस्तक में है | वह दौर था जब कांग्रेस आलाकमान यूपीए सरकार में शामिल मंत्रियों की लूट-खसोट पर रोक लगा पाने में असफल थी और कांग्रेस की साख गिरने लगी थी | भ्रष्टाचार उस वक्त कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी थी जिसे पूर्व प्रधानमंत्री कन्ट्रोल नहीं कर सके | चूँकि संजय बारू मनमोहन सिंह के काफी करीबी थे इसलिए इस फिल्म में दिखाई गयी घटनाएं काल्पनिक हो इस पर जनता मुश्किल से विश्वास करेगी | बस यही कांग्रेस की परेशानी है | जहाँ तक फिल्म में मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे अनुपम खेर की बात है तो अनुपम खेर पहले भी कई मुद्दों पर एनडीए सरकार के पक्ष में बोलते आये हैं और उनकी पत्नी किरण खेर भाजपा सांसद भी हैं तो उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कांग्रेस पर इस फिल्म का क्या असर पड़ेगा |

फिल्म में संजय बारू के किरदार में अक्षय खन्ना दिखेंगे और सोनिया गाँधी ,राहुल गाँधी के रोल भी दिखने को मिलेंगे जिससे कांग्रेस का असहज होना लाजमी है | मनमोहन सिंह के कार्यालय से जो प्रतिकिया आयी वह उसमें संजय बारू पर व्यावसायिक लाभ और पद का दुरूपयोग करने का आरोप लगाया गया जिस पर संजय बारू ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी | उन्होंने साफ-साफ़ कहा कि वो मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान वो उनके बहुत करीब रहे और यूपीए सरकार पार्ट 2 की असफलताओं पर उनका सटीक विश्लेषण है | मनमोहन सिंह इस फिल्म पर कोई प्रतिक्रिया देने के स्थिति में नहीं हैं शायद उनकी कोई प्रतिक्रिया इस मुद्दे को और हवा दे अतः कांग्रेस के युवा नेता अब केवल इस बात की माँग कर रहे हैं कि रिलीज होने से पहले उन्हें फिल्म दिखाई जाये |

मुद्दा अपने चरम पर है | फिल्म के डायरेक्टर और अनुपम खेर भी पूरी तरह लड़ाई के लिए तैयार है मीडिया के लोग दोनों तरफ कैमरा लगाए बयान रिकार्ड करने को तैयार बैठे हैं | अब इस फिल्म के वास्तव के कितना सच है और कितनी कल्पना यह फिल्म देखने के बाद ही पता लगेगा | पर यह बात बिल्कुल सही मनमोहन सिंह की रिमोट कंट्रोल वाली छवि पहले से बनायीं जनता का विश्वास अगर मजबूत हो गया और कांग्रेस आलाकमान की कमजोरियों पर ध्यान गया तो आने वाले चुनाव में बीजेपी इसे अपने पक्ष में भुना सकती है और शायद कांग्रेस की डर है वरना अभिव्यक्ति की आजादी तो कांग्रेस का फेवरेट विषय है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *